टैली क्या है और कैसे सीखें हिंदी में पूरी जानकारी

Tally Kya hai

क्या आप जाना चाहते हैं टैली क्या है। अगर हां तो आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। जिसमें हमने टैली से संबंधित काफी सारी जानकारी के बारे में बताया है। हमारा विश्वास है कि अगर आपने हमारा यह आर्टिकल पूरा पढ़ लिया तो आपको टैली से संबंधित काफी सारी जानकारी हो जाएगी।

मगर उससे पहले आपको यह तो पता ही होगा कि आज के समय में कंप्यूटर का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। चाहे वह हॉस्पिटल हो बैंक हो या स्कूल और इन्हीं में से ऐसी बहुत सारी कंपनियां हैं। जो या तो अपने प्रोडक्ट बनाती हैं या किसी और कंपनी से उन प्रोडक्ट को खरीद कर बेचती हैं

और व्यापार में इन्हीं लेनदेन का रिकॉर्ड रखने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। मगर कंप्यूटर के अंदर इन लेन-देन का रिकॉर्ड रखने के लिए आपको सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। इन सॉफ्टवेयर की मदद से ही आप अलग-अलग कामों को कर सकते हैं क्योंकि हर एक काम के लिए एक अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है।

उन्ही में से जब हमें किसी संस्था या कंपनी का रिकॉर्ड रखना होता है। तो उसमें हम टैली का इस्तेमाल करते हैं। यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है। जिसका इस्तेमाल हम व्यापार में होने वाले लेनदेन का रिकॉर्ड रखने के लिए करते हैं। तो चलिए फिर अब हम जानते हैं कि टैली क्या है। टैली के क्या-क्या फायदे हैं या टैली कैसे सीखे। चलिए शुरू करते हैं।

टैली क्या है।

टैली (Tally) का फुल फॉर्म ट्रांजैक्शंस अलाउड इन अ लीनियर लाइन यार्ड्स (transactions allowed in a linear line yards) होती है। वहीं टैली का अर्थ पैसे की गणना करना साथ ही उसका व्यवस्थापन और संरक्षित करना है।

इसके अलावा बस तू कहां से खरीदी गई कितने में खरीदी गई इन सभी का हिसाब यानी रिकॉर्ड टैली में रखा जाता है। मगर कंप्यूटर के आने से पहले भी लोग जब व्यापार करते थे तो व्यापार में होने वाले लेनदेन को वह पुस्तकों में लिखा करते थे।

जिसे पुस्तपालन कहा जाता है। मगर आज के समय में यह बड़े व्यापारियों वह उद्योगपतियों के लिए उपयोगी नहीं है क्योंकि बड़े व्यापार के अंदर बहुत ज्यादा लेनदेन होता है इसलिए इन्हें बार-बार पुस्तकों में लिखना मुश्किल हो जाता है।

मगर कंप्यूटर का इस्तेमाल करने से इसे आसानी से किया जा सकता है और जब इन कामों को करने के लिए सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है तो अकाउंटिंग के लिए टैली सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है यानी अकाउंट का हिसाब रखने के लिए टैली का इस्तेमाल सबसे ज्यादा कंपनियों द्वारा किया जाता है।

क्योंकि अकाउंटिंग में काफी सारी मुश्किल गणना होती है। जिनको बिना सॉफ्टवेयर के करना काफी ज्यादा मुश्किल होता है इसलिए इन सभी को आसानी से और जल्दी से करने के लिए टैली का इस्तेमाल किया जाता है।

इसी के साथ आपको एक बात बता दूं की इसका इस्तेमाल भारत के साथ-साथ बाहर के भी कई देशों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। तो फिर चलिए अब आगे जानते हैं कि टैली का इतिहास क्या है यानी इसको किसने बनाया था।

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टैली का इतिहास क्या है।

चलिए आप जानते हैं टैली का इतिहास क्या है यानी इसको किसने बनाया था। इसकी शुरुआत कैसे और कब हुई थी आदि। टैली को वर्ष 1986 में श्याम सुंदर गोयनका और उनके बेटे भारत गोयनका ने मिलकर बनाया था। उस समय श्याम सुंदर गोयनका एक कंपनी चलाया करते थे।

जिसमें वह प्लांट्स और टेक्सटाइल मिल को कच्चा माल और पार्ट्स सप्लाई करते थे। मगर अपने व्यापार में होने वाले लेन-देन का हिसाब रखने के लिए उनके पास कोई एक अच्छा सॉफ्टवेयर नहीं था इसलिए इन्होंने अपने बेटे से कहा कि कोई एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाओ।

जिससे व्यापार को अच्छे से संचालित किया जा सके यानी व्यापार के लेन-देन का रिकॉर्ड अच्छे से रखा जा सके। उनके बेटे जो कि मैथमेटिक्स में ग्रेजुएट थे। उन्होंने अकाउंटिंग एप्लीकेशन के लिए सबसे पहला संस्करण Ms-Dos एप्लीकेशन के रूप में लांच किया था।

इसमें सिर्फ साधारण अकाउंट फीचर थी। जिसका नाम पेट्रोनिक्स फाइनेंशियल अकाउंटेंट रखा गया। उसके बाद 1988 में इसका नाम बदलकर टैली रखा गया। फिर इसके बाद 1999 में इस कंपनी ने अपना नाम बदलकर भी टैली सॉल्यूशन रख लिया। चलिए जानते हैं टैली के कितने वर्जन आ चुके हैं।

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टैली के वर्जन।

चलिए अब जानते हैं टैली के कितने वर्जन अभी तक आ चुके हैं।

  • टैली 4.5 यह टैली का सबसे पहला वर्जन था। इसे 1990 में रिलीज किया गया था। यह Ms-dos पर आधारित था।
  • टैली 5.4 यह टैली का दूसरा वर्जन था। इसे 1996 में रिलीज किया गया था। यह एक ग्राफिक इंटरफेस वर्जन था।
  • टैली 6.3 यह टैली का तीसरा वर्जन था। यह 2001 में जारी किया गया था। यह वर्जन थोड़ा एडवांस था। क्योंकि इसमें अकाउंटिंग के साथ-साथ एजुकेशनल उद्देश्य से उपयोग करने की योग्यता थी।
  • टैली 7.2 इस वर्जन को 2005 में रिलीज किया गया था। इसमें एक मुख्य फीचर था और वह था value added taxation यानी VAT. जो कि भारतीय कस्टमर्स के लिए काफी उपयोगी था।
  • टैली 8.1 और टैली 9 इन दोनों वर्जन को एक ही साल यानी 2006 में रिलीज किया गया था।
  • टैली ईआरपी 9 इस मोबाइल को 2009 में रिलीज किया गया था। यह छोटे व बड़े दोनों व्यापारियों के लिए सुविधा प्रदान करता था।
  • 2016 में जीएसटी सेवा प्रदान करने के लिए टैली सॉल्यूशन को चुना गया और फिर 2017 में कंपनी ने बिल्कुल अपडेटेड जीएसटी कॉम्प्लीयंस सॉफ्टवेयर रिलीज किया।
  • टैलीप्राइम इसको 2020 में रिलीज किया गया था। यह नेक्स्ट जेनरेशन बिजनेस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर था।

हमने यह जानकारी विकिपीडिया से ली है। आप विकीपीडिया लिंक पर क्लिक करके विकीपीडिया पेज को पढ़ सकते हैं। चलिए अब आगे जानते हैं टैली कैसे सीखे।

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टैली कैसे सीखें।

अभी तक हमने टैली के बारे में काफी कुछ जाना है चलिए अब जानते हैं कि टैली कैसे सीखे। वैसे टेली सीखने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप अपने किसी भी नजदीकी कंप्यूटर कोचिंग इंस्टिट्यूट में जाएं और टैली कंप्यूटर कोर्स करें।

मगर जब आप टैली सीखने जाते हैं। तो आपको यह थोड़ा मुश्किल लग सकता है क्योंकि टैली सीखना इतना आसान नहीं है और ज्यादा मुश्किल भी नहीं है। यह थोड़ा मुश्किल इसलिए होता है क्योंकि इसमें माउस का बिल्कुल भी काम नहीं होता बल्कि सारा काम हमें कीबोर्ड से करना होता है।

मगर जब आप इसके बेसिक अच्छी तरह से सीख जाते हैं। तो आपको इसे करने में मजा भी आने लगता है। क्योंकि चाहे टैली हो या कोई अन्य सॉफ्टवेयर या प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। अगर आप उसके बेसिक सीख गए।

तो आप उसे आसानी से कर सकते हैं और यह बात टैली पर भी लागू होती है। तो चलिए अब टैली में इस्तेमाल होने वाली चीजों के बारे में जान लेते हैं। जो टैली में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं।

Capital – जब व्यापारी द्वारा व्यापार में जो पैसा लगाया जाता है। तो उसे कैपिटल कहते हैं और साथ में इसे इक्विटी और हिंदी में पूंजी कहते हैं।

Discount – जब कोई व्यापारी अपने माल या प्रोडक्ट की बिक्री को बढ़ाने के लिए अपने प्रोडक्ट या माल को उसकी असल कीमत से कुछ परसेंट कम कीमत पर बेचता है। तो उसे डिस्काउंट कहते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई प्रोडक्ट ₹1000 का है और व्यापारी उस पर 10% की छूट दे रहा है। तो आपको वह प्रोडक्ट ₹900 में मिल जाएगा और यहां पर जो 10% है। वह डिस्काउंट है। जो ग्राहक को दिया गया है। डिस्काउंट भी दो तरह के होते हैं। जिनके बारे में नीचे बताया गया है।

Trade discount – यह डिस्काउंट व्यापारी अपने कस्टमर को तब देता है। जब वह ज्यादा माल खरीदना है।

Cash discount – यह डिस्काउंट तब दिया जाता है। जब कोई कस्टमर पेमेंट जल्द ही और कैश के रूप में कर देता है।

Transaction – पैसे के लेनदेन को ही ट्रांजैक्शन कहते हैं। इसमें जब कोई दूसरा आपको पैसे देता है या आप किसी दूसरे को पैसे देते हैं। तो उसे ट्रांजैक्शन ही कहा जाता है।

Liability – यह वह माल होता है। जिसे कर्ज के रूप में लिया जाता है।

Assets – बिजनेस से जुड़ी जितनी भी चीजें होती हैं या व्यापार में जिन चीजों से पैसा आता है। उन्हें एसिड्स यानी संपत्तियां कहते हैं।

यहां पर हमने कुछ ही शब्दों के बारे में जाना है। जिन्हें टैली को सीखते समय इस्तेमाल किया जाता है। जब आप टैली को सीखने के लिए टैली का पूरा कोर्स करेंगे। तो आपको और भी चीजों के बारे में बताया जाएगा। चलिए आगे जानते हैं टैली के फायदों के बारे में।

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टैली सिखने के फायदे।

चलिए अब आगे जानते हैं टैली सिखने के फायदों के बारे में। अगर आपने 12वीं की पढ़ाई कॉमर्स के साथ की है। तो आपको टैली का कोर्स जरूर करना चाहिए। क्योंकि स्टूडेंट्स अक्सर 12वीं के बाद यह सोचते हैं कि अपना करियर कहां बनाएं।

मगर वैसे तो कैरियर की बात जब आती है तो आपको हमेशा एक ऐसी फील्ड चुननी चाहिए। जिसमें आपको इंटरेस्ट हो या नॉलेज हो आपको किसी और के कहने पर अपने करियर का चुनाव बिल्कुल ना करें। हां यह हो सकता है कि कोई आपको एक सही कैरियर के बारे में बताएं।

जिससे आपकी जिंदगी बन सके। मगर हमेशा नहीं होगा इसलिए अपने आप सोच कर और समझ कर अपने करियर का चुनाव करें। मगर कुछ स्टूडेंट ऐसे होते हैं जो गरीब परिवार से आते हैं और एक बहुत ही महंगा कोर्स नहीं कर सकते तो उनके लिए मैं कहूंगा कि आप को शुरुआत में टैली का कोर्स करना चाहिए।

जिससे आपको एक अच्छी नौकरी मिल सके। देखिए मैं आपको झूठ नहीं बोलूंगा कि आप इस कोर्स को करके 1 महीने में लाखों रुपए कमा लेंगे तो ऐसा नहीं है। मगर शुरुआत में आपको से करना चाहिए। अगर आपने कॉमर्स से पढ़ाई की है।

तो बाकी आपकी मर्जी है कि आप जिस फील्ड में जाना चाहते हैं। आपको उसी हिसाब से पढ़ना चाहिए। और उसी हिसाब से कोर्स करने चाहिए। किसी भी कोर्स में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

जिसका इस्तेमाल आप कभी करेंगे ही नहीं आप उसको उसको सिर्फ इसलिए कर रहे हैं या तो आपका दोस्त कर रहा है या किसी ने आपको कहा है। इसलिए आप अपना दिमाग लगाएं और खुद सोच समझ कर करें। चलिए आगे जानते हैं टैली से संबंधित कुछ प्रश्न उत्तर।

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टैली से संबंधित प्रश्न उत्तर।

चलिए अब जानते है टैली से संबंधित कुछ प्रश्न उत्तर। जो लोगों द्वारा पूछे जाते हैं।

1. टैली का फुल फॉर्म क्या है।

उत्तर: टैली का फुल फॉर्म ट्रांजैक्शंस अलाउड इन अ लीनियर लाइन यार्ड्स होता है।

2. टैली को किसने बनाया था।

उत्तर: टैली को श्याम सुंदर गोयनका और उनके बेटे भारत गोयनका ने मिलकर बनाया था।

3. टैली का सबसे पहला वर्जन कौन सा था।

उत्तर: टैली का सबसे पहला वर्जन टैली 4.5 था।

4. क्या आज के समय में टैली सीखना फायदेमंद है।

उत्तर: हां बिल्कुल आज के समय में टैली सीखना फायदेमंद है। आप इससे एक अच्छी जॉब पा सकते हैं।

5. टैली का ज्यादातर इस्तेमाल कहां किया जाता है।

उत्तर: टैली का इस्तेमाल ज्यादातर वह कंपनियां करती हैं। जो या तो माल बनाती हैं या किसी दूसरी कंपनी से माल खरीदकर किसी और को बेच देती हैं और इन सभी लेन-देन का हिसाब रखने के लिए टैली का इस्तेमाल किया जाता है।

आपने क्या सीखा।

हम आशा करते हैं। आपको अच्छे से समझ में आ गया होगा की टैली क्या है और इसे कैसे सीखे। अगर आपको कुछ समझ में नहीं आया है या आप किसी अन्य विषय के ऊपर जाना चाहते हैं। तो आप हमें कमेंट जरूर करें। हम आपकी कमेंट का जवाब जरूर देंगे।

वही आप हमारे ब्लॉग पर उपस्थित और भी अन्य आर्टिकल्स को पढ़ सकते हैं। जिसमें हमने बहुत ही महत्व जानकारी प्रदान की है। हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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